सूर्य तांत्रिक मंत्र- ॐ ह्रां ह्रीं हौं स: सूर्याय नम:।

एकाक्षरी बीज मंत्र- ॐ घृणि: सूर्याय नम:

दान- माणिक्य, गेहूं, धेनु, कमल, गुड़, ताम्र, लाल कपड़े, लाल पुष्प, सुवर्ण।

चंद्र/ सोम

सूर्य तांत्रिक मंत्र- ‘ॐ श्रां श्रीं श्रौं स: चन्द्रमसे नम:’।

चंद्र एकाक्षरी मंत्र- ॐ सों सोमाय नम:।

जप संख्या– 11,000

दान– वंशपात्र, तंदुल, कपूर, घी, शंख।

मंगल/भौम

भौम मंत्र- ‘ॐ क्रां क्रीं क्रौं स: भौमाय नम:’।

भौम एकाक्षरी मंत्र- ॐ ॐ अंगारकाय नम:।

जप संख्या- 1000

दान– प्रवाह, गेहूं, मसूर, लाल वस्त्र, गुड़, सुवर्ण ताम्र।

बुध मंत्र- ‘ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:’।

बुध का एकाक्षरी मंत्र- ‘ॐ बुं बुधाय नम:’।

जप संख्या– 9,000

दान– मूंग, हरा वस्त्र, सुवर्ण, कांस्य।

गुरु/बृहस्पति

गुरु मंत्र- ‘ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरवे नम:’।

गुरु का एकाक्षरी मंत्र- ‘ॐ ब्रं बृहस्पतये नम:’।

जप संख्या– 19,000

दान– अश्व, शर्करा, हल्दी, पीला वस्त्र, पीतधान्य, पुष्पराग, लवण।

शुक्र

शुक्र मंत्र- ‘ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:’।

शुक्र का एकाक्षरी मंत्र- ‘ॐ शुं शुक्राय नम:’।
जप संख्या– 16,000

दान– धेनु, हीरा, रौप्य, सुवर्ण, सुगंध, घी।

शनि मंत्र- ‘ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनये नम:’।

शनि का एकाक्षरी मंत्र- ‘ॐ शं शनैश्चराय नम:’

जप संख्या– 23000।

दान- तिल, तेल, कुलित्‍थ, महिषी, श्याम वस्त्र।

राहु

राहु मंत्र- ‘ॐ भ्रां भ्रीं भ्रों स: राहवे नम:’।

राहु का एकाक्षरी मंत्र- ‘ॐ रां राहुवे नम:’।

जप संख्या– 18,000

दान– गोमेद, अश्व, कृष्णवस्त्र, कम्बल, तिल, तेल, लोहा, अभ्रक।

केतु

केतु का तांत्रिक मंत्र- ‘ॐ स्रां स्रीं स्रों स: केतवे नम:’।

केतु का एकाक्षरी मंत्र- ‘ॐ के केतवे नम:’।

जप संख्या– 17,000।

दान– तिल, कंबल, कस्तूरी, शस्त्र, नीम वस्त्र, तेल, कृष्णपुष्प, छाग, लौहपात्र।